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हम अपने ट्रेक्स की कठिनाई कैसे तय करते हैं

हमारी पाँच चरणों वाली श्रेणी, हर चरण आपके पैरों से क्या माँगता है, और तैयारी कैसे करें।

ट्रेकिंग विज्ञापनों में “आसान” सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द है। हम हर ट्रेक को पाँच चरणों की श्रेणी पर आँकते हैं और हर कार्ड पर पाँच बिंदुओं में दिखाते हैं, ताकि आप देवकुंड और कलसूबाई की तुलना एक नज़र में कर सकें।

श्रेणी

  1. आसान: बना हुआ रास्ता, हल्की चढ़ाई। अगर आप 5 किमी स्थिर गति से चल सकते हैं, तो यह आपके लिए है।
  2. आसान–मध्यम: कुछ जगह खड़ी, पथरीली या फिसलन भरी राह, बारिश में नाले पार करने पड़ते हैं।
  3. मध्यम: लगातार चढ़ाई, सीढ़ियाँ या खुली चट्टानें, अक्सर रात में शुरुआत। कलसूबाई यहीं आता है।
  4. मध्यम–कठिन: लंबे, खड़े दिन और चट्टानी चढ़ाई। पहले के ट्रेक का अनुभव चाहिए।
  5. कठिन: तकनीकी हिस्से या बहुत लंबे दिन। सिर्फ़ अनुभवी ट्रेकर्स के लिए।

मौसम श्रेणी बदल देता है

वही रास्ता नवंबर से ज़्यादा अगस्त में कठिन होता है। बारिश में चट्टानें फिसलन भरी होती हैं और नालों का पानी तेज़ी से बढ़ता है। मौसम बदले तो ट्रेक लीडर का फ़ैसला अंतिम होता है।

तैयारी

दो-तीन हफ़्ते तेज़ चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना या हल्की जॉगिंग करने से मध्यम ट्रेक मुश्किल नहीं, मज़ेदार लगता है। कोई मेडिकल समस्या हो तो ट्रेक से पहले हमें ज़रूर बताएँ।

सभी ट्रेक्स के साथ पूरी श्रेणी हमारे सुरक्षा पेज पर देखें।

आपका अगला वीकेंड सह्याद्री में है।

बताइए कौन-सा ट्रेक और कितने लोग। हम तारीख़ें और सीटें बताकर जवाब देंगे।